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              क्या होता है जब किसी को हो जाता है कोरोनावायरस का संक्रमण | यह वायरस किस तरह शरीर पर हमला करता है इसका इलाज किस तरह किया जाता है और क्यों कई ऐसे लोगों की इस से मौत हो जाती है जिनका हॉस्पिटल में इलाज चल रहा होता है| इन सारे सवालों का जवाब हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से देने वाले है | दोस्तों कोरोना का 5 दिन का इनक्यूबेशन पीरियड रहता है ये वो 5 दिन होते हैं जब कोरोना ना तो कोई लक्षण दिखाता है ना कोई संक्रामक रहता है| इन 5 दिनों के बाद जब लक्षण आने शुरू होते हैं तब संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है| इनक्यूबेशन पीरियड किसी भी वायरस का वो वक्त होता है जब ये वायरस इंसान के शरीर में जम जाता है| शरीर के भीतर जाने के बाद ये वायरस इंसान के लिए सांस लेने में तकलीफ पैदा करता है|


               इसका पहला हमला आपके गले के आसपास की कोशिकाओं पर होता है, इसके बाद सास कि नली और फेफड़ों पर हमला होत है| जहां यह एक तरह की कोरोनावायरस फैक्ट्रीज बनाता है यानी यहां अपनी संख्या बढ़ाता है नए कोरोनावायरस बाकी कोशिकाओं पर हमले में लग जाते हैं| शुरुआती दौर में आप बीमार महसूस नहीं करते हालांकि कुछ लोगों में संक्रमण के शुरुआती वक्त से ही लक्षण दिखाई देने लगते हैं| वायरस इनक्यूबेशन पीरियड भी लोगो में अलग अलग हो सकता है| औसतन ये 5 दिन होता है अधिकतर लोगों में जो लक्षण दिखाई देते हैं वह मामूली होता है| कह जा सकता है कि लोगों में से 10 में से 8 में लक्षण बहुत मामुली होते हैं और बुखार और खांसी होते हैं, बदन दर्द गले में खराश और सिर दर्द भी हो सकता है|


           आपके शरीर का इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ने की कोशिश करता है आपका शरीर वायरस को एक विदेशी हमलावर की तरह देखता है और पूरे शरीर को संकेत देता है कि शरीर पर हमला हुआ है इसके बाद वायरस को खत्म करने के लिए साइटोंकाइन का नाम का केमिकल छोड़ना शुरू करता है शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति पुरे जोर से हमले का जवाब देने में जुट जाती है और इस कारण आपको बदन दर्द और बुखार भी हो सकता है| कोरोनावायरस के कारण होने वाली खांसी अमूमन सूखी खांसी होती है जिसमें बलगम नहीं आता लेकिन कभी-कभी यह मामला खराश तक ही सीमित हो सकता है कुछ लोगों को खांसी में बलगम भी आ सकता है ऐसे मामलों में बलगम में फेफड़ों की वह मृत कोशिकाएं भी होती है जो वायरस के कारण नष्ट हो जाती है इन लक्षणों में अक्सर डॉक्टर आपको आराम करने खूब सारा पानी पीने और पैरासिटामोल लेने के लिए कहता है अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है 1 सप्ताह चलती है| जिन लोगों का इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ने में कामयाब हो जाता है उनका स्वास्थ्य 1 सप्ताह के भीतर सुधरने लगता है लेकिन कुछ मामलों में व्यक्तिगत स्वास्थ्य और बिगड़ता है कोविड-19 के गंभीर लक्षण दिखने लगते हैं अब तक कोविड-19 के बारे में जो जानकारी सामने आई है उसे अब तक यह पता चला है| लेकिन हाल ही में कुछ अध्ययन सामने आए जिनका कहना है कि इस बीमारी में नाक बहने जैसे सर्दी जुकाम के लक्षण भी देखने को मिल सकता है|


अगर बीमारी बढ़ जाए तो उसके कई कारण हो सकते हैं |
      पहला ये कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता वायरस को खत्म करने लिये जरुरत से ज्यादा काम करती है| इस दौरान जो केमिकल बनते हैं वह पूरे शरीर को संकेत देते हैं जिससे शरीर सूजने लगता है कभी-कभी सूजन के कारण शरीर को गंभीर क्षति पहुंचती है वायरस के कारण रोग प्रतिरोधक तंत्र का संतुलन बिगड़ता है और सूजन दिखनी शुरू हो जाती है हम अब तक यह नहीं जान पाए कि वायरस कैसे यह काम करता है|

          फेफड़ों के इसी सूजन को निमोनिया कहते हैं अगर ये वायरस आपके मुंह से होते तो आपकी सांस की नली में प्रवेश करता है और फिर आपके फेफड़ों तक पहुंच जाता है तो आपके फेफड़ों के छोटे-छोटे एयर होल्स को बंद कर देता है| इंसान के फेफड़े शरीर में वो जगह है जहां से आक्सिजन शरीर में पहुंचने शुरू हो जाती है जबकि कार्बन डाइऑक्साइड शरीर से बाहर निकलती है लेकिन कोरोना के बनाए छोटे-छोटे एयर होल को बंद करने पर पानी जमने लगता है और इस कारण आप को सांस लेने में तकलीफ होती है और आप लंबी सांस नहीं ले पाते| ऐसे स्टेज में मरीज को वेंटिलेटर जरूरत पड़ती है|


        चीन में 56000 संक्रमित लोगों के बारे में एकत्र की गई जानकारी पर आधारित विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक अध्ययन बताता है कि 14 फ़ीसदी लोगों में संक्रमण के इस तरह के गंभीर लक्षण देखे गए बताया जाता है कि 6 फ़ीसदी लोग इस वायरस के कारण बेहद गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं इस स्टेज में इंसान का शरीर वायरस के सामने हार जाता है और गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है स्टेज पर फेफड़े का फेल होना सबटिक सोक ऑर्गन फेलियर जैसी चीजें यानी की मौत के जोखिम तक हो सकती है| इस अस्तर पर रोग प्रतिरोधक शक्ति काबू से बाहर हो जाती है और शरीर को गंभीर क्षति पहुंचती है|

 


          फेफड़ों में सूजन के कारण शरीर को जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन नहीं मिल पाती इसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है और खून साफ करने का काम करती वह काम करना बंद कर देती है साथ ही आपकी अतड़िया भी प्रभावित हो जाती है वायरस के कारण शरीर की सूजन इतनी बढ़ जाती है कि शरीर की कई ऑर्गन फेल हो जाते हैं जिससे इंसान मर सकता है स्टेज पर इलाज के लिए ईसीएमओ यानी एक्स्ट्रा कोर्पल मेमरिन ऑक्सिजनेशन का इस्तेमाल किया जाता है | इसमें एक तरह की कृत्रिम फेफड़ों का इस्तेमाल किया जाता है जो शरीर के अंदर का खून बाहर निकालकर उसे ऑक्सिजनेट करके वापस शरीर में डाल देते हैं लेकिन पुख्ता तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि ये इलाज कारगर ही होगा, कोरोनावायरस आपकी आंखों के रास्ते चेहरे के रास्ते मुंह के रास्ते आपके हाथों के रास्ते आपकी शरीर में इंटर कर सकता है इसलिए सैनिटाइजेशन, हैंड सैनिटाइजेशन,फ़ेस सैनिटाइजर को बहुत ज्यादा महत्व दीजिए |

 


       कोरोनावायरस संक्रमित जो शख्स होता है वह जब सीखता है खाता है तो उससे जो ड्रॉपलेट्स निकलते हैं जो फ़ुबारा निकलता है सलाइवा उसके गले से उसके मुंह से फ़ोर्स फ़ुल खांसी या आपके छींकने की वजह से वह को संक्रमित कर सकता है और अगर वह किसी सतह पर गिरे जैसे की लकड़ी या फ़िर स्टील पर तो वहां पर कुछ दिनों तक या कुछ घंटों तक रह सकता और उन वस्तुओं को अगर आप छू लेते है तो फिर आपके उन छूए हुए हाथों से अपने मुंह या नाक, कान, आख तक को टच कर लेते हैं तो आपको संक्रमण होने का खतरा बेहद बढ़ जाता है| लकड़ी पर जब छींटे पड़ते हैं कोरोनावायरस के तो ये कुछ घंटों के लिए एक्टिव रहते हैं लेकिन स्टील पर पढ़ने के बाद ही पूरे 2 दिन तक एक्टिव रहता है आपको बता दें भ्रांति फैल रही है कि गर्मियों का असर पड़ने वाला है कोरोनावायरस पर|आपको बता दे कि कोरोनावायरस पर गर्मियों का कोई असर नहीं पड़ता क्योंकि वायरस 60 से 70 डिग्री सेल्सियस पर भी जीवित रह सकता है और ह्यूमन बॉडी के अंदर कितना टेंपरेचर कभी भी डेवलप नहीं हो सकता और ना ही ऐसा वातावरण हो सकता है| इसलिये कोरोना ठन्डे देशो मे पाया जा रहा है और गर्म देशों में भी पाया जा रहा है| और इस पर गर्मी का कोई असर नहीं होगा |


          यह जरूर कहा जा सकता है कि जो ड्रॉपलेट इनफेक्शन हो रहे हैं जो किसी सतह पर गिर कर हो रहे है| कोरोना संक्रमित कोई व्यक्ति खाता है छींकता है उसके ड्रॉपलेट जो होते हैं वह किसी सतह पर गिर जाते हैं जैसे लकड़ी फर्श या किसी भी तथा पर गिर जाते हैं तो गर्मी के दिनों में वाष्प बन कर जल्दी उड़ जाएंगे | यह कह सकते हैं कि ड्रॉपलेट इनफेक्शन में थोड़ी ना थोड़ी कमी तो जरूर आएगी लेकिन कोरोनावायरस पर गर्मी का कोई असर नहीं पड़ता बचाव का सिर्फ एक तरीका अपने आपको आइसोलेटेड रखें और अपने आप को जितना हो सके लोगों से दूरी बनाकर रखिये, 1 मीटर का डिस्टेंस, कभी भी मास्क ना उतारे, किसी अन्य व्यक्ति से मिलते समय आप अपने आपको बचा सकते है| बचाव ही कोरोना का इलाज है और कुछ नहीं, अगर कोरोनावायरस आपको हो जाता है तो घबराइए नहीं आप सुरक्षित है | 100 में से केवल 1.4% लोगों की मृत्यु होती है और उनमें से भी वह लोग होते हैं जो या तो छोटे बच्चे होते हैं जिनकी प्रतिरोधक क्षमता अभी डेवलेप नहीं हुई है या वह ओल्ड एज के लोग हैं जिनकी उम्र बहुत ज्यादा हो चुकी है और उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो चुकी है एक और बात जो ऑलरेडी किसी बड़ी टर्मिनल इलनेस से जूझ रहे हैं जिन कैंसर डायबिटीज है जिन्हें हार्ड डिजीज है ऐसे लोग कोरोना होने पर ज्यादा चांसेस है कि उनकी जान को खतरा होगा, तो दोस्तों इस बीमारी से डरने की जरूरत नहीं है इसके बारे में जानकारी होनी चाहिए आपको, 
हाथ धोएं, फ़ेस को ना छुए, ना आंखों को छुए, ना नाक को छुए, ना चेहरे छुए, ना मुह को छुए| किसी भी तरीके से हाथों और चेहरे के बीच डिस्टेंस मेंटेन करें ऐसी जगह पर ना जाएं जहां पर छींकने खांकने वाले लोग होते हैं हॉस्पिटल से रेलवे स्टेशन ऐसी जगहों से दूरी बनाकर रखें और बाहर का खाना तो बिल्कुल भी ना खाएं अपने आपको सुरक्षित रखे देश को बचाएं कोरोनावायरस से|
दोस्तो जितना हो सके इस पोस्ट को शेयर कर दीजिये और बताएं कि किस तरीके से कोरोनावायरस इंसानी शरीर को तबाह करता है|

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raj
raj
3 months ago

Hey you are doing

Raj
Raj
3 months ago

Hey

DjAatish
DjAatish
3 months ago

Hello

Deejay
Deejay
3 months ago

Hi This Dj

Ajaj Ansari
Ajaj Ansari
3 months ago

Corona virus garmi se khatam ho sakta hai

Anshu
Anshu
3 months ago
Reply to  Ajaj Ansari

Nahi

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