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                दोस्तो शायद रेलवे ने आप सभी की सुन ली क्योंकि रेलवे हर बड़े बड़े स्टेशनों पर इस टाइप के सेनेटाइज टनल लगवा रही है। जिसके अंदर से गुजरने बाद ही लोग प्लेटफोम के अंदर प्रवेश करेंगे |

         यह सेनेटाइज टनल कैसे काम करते इनमे किस टाइप के केमिकल का छिड़काउ होता है। और यह शरीर को नुकसान करता है या की नही |

दोस्तो सभी ट्रेनो को चलाने को लेकर रेलवे के तरफ से कोई भी फैसला नही आया है। लेकिन प्लानिंग चल रही है। और जल्दी ही ट्रेने चलाई जाएंगी, जब भी ट्रेने चलेंगी तब यात्रियों को ऐसे सेनेटाइज टनल से होकर ही प्लेटफॉम के अंदर प्रवेश करना पड़ेगा, दोस्तो जैसे ही सेनेटाइज टनल के पास कोई भी ब्यक्ति आएगा इसमे लगा सेंसर उसे डिटेक्ट करेगा इसके बाद इसके चारों तरफ नोज़ल से सोडियम हाइपोक्लोराइट सलूशन का एक मिक्सचर स्प्रे होगा, दोस्तो क्लोरीन जिससे कि कीटनासक या फिर ब्लीचिंग के रूप में इस्तेमाल किया जाता है |

              सोडियम हाइपोक्लोराइट इसी का एक विरंजक होता है। जो जल में शोधक प्रणालियों से कीटनासक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यख एक एंटीसेप्टिक होता है। इसीलिए यह मानव शरीर को कोई भी नुकसान नही पहुचता है। दोस्तो इस सेनेटाइज टनल में 500 लीटर का एक टैंक होता है। जिसमे केमिकल को भरा जाता है, जो कि 15 से 20 घंटे तक लगातार केमिकल का छिड़काउ कर सकती है और लोगो को सेनेटाइज कर अंदर प्रवेश करवा सकती है। दोस्तो इस तरह से देखा जाए। तो यह रेलवे की तरफ से एक बहुत अच्छी प्रयास है जिससे लोगो को सेनेटाइज होकर स्टेशन में प्रवेश करने का मौका मिलेगा बाकी इसे लेकर आपकी क्या राय है कमेंट कर के जरूर बताइये |

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