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                 दिसंबर के शुरुआती हफ्ते में वुहान की सी फूड मार्केट के इर्द-गिर्द रहने वाले कई लोग अचानक बुखार से पीड़ित होने शुरू हो जाते हैं इनके टेस्ट के लिए सैंपल लैब में भेजे गए जिसके बाद सैंपल Wuhan National Institute of Virology Bio Safety Lab के पास पहुंचे | यहां वैज्ञानिकों के माइक्रोस्कोप से जो दिख रहा था वो आने वाले जानलेवा ग्लोबल खतरे का संकेत था | मगर चीनी अधिकारियों ने डॉक्टर और वैज्ञानिकों को बदनामी और अफरा-तफरी के माहौल से बचने के लिए खामोश करा दिया|

               डॉ लीवेल्लियांन्ग उनके अस्पताल में स्थानीय थी फूड मार्केट से करीब 7 मरीज पहुंचे, यह वही डॉ लीवेल्लियांन्ग थे जिन्होने दुनिया को पहली बार इस जानलेवा वायरस से आगाह करवाया था | बहरहाल इन मरीजों के लक्षण देखकर ही डॉक्टर को समझ में आ गया कि यह सभी के सभी किसी अनजान घातक वायरस के शिकार हो गए उन्होंने बीमारी के बारे में दूसरे डॉक्टर को अलर्ट किया | और इस वायरस इसके बारे में अपनी रिपोर्ट दी| और इतना ही नही बल्कि वी चैट ऐप पर इन्होने अपने मेडिकल ग्रुप में जानकारी दी और सबको अपने जानकारों को दोस्तों और रिश्तेदारों को इस बारे में आगाह कर दिया लेकिन कुछ ही घंटों में उनके मैसेज का स्क्रीनशॉट वायरल हो गया इसके बाद चीन ने डॉक्टर ली के साथ क्या किया यह हम आपको आगे बताएंगे नए साल के जश्न में दुनिया और चीन डूबे हुए थे और ठीक उनकी नाक के नीचे वायरस तभी लगातार फैलता जा रहा था 7 से 14 14 से 21 और 21 42 होते-होते तादाद सैकड़ों में पहुंच गई, मगर चीन इस पर रोकथाम की बजाय इस जानलेवा बीमारी को दुनिया से छुपाने में लगा रहा अफरा-तफरी से बचने के लिए चीन ने इस जानलेवा वायरस के खबर को सामने नहीं आने दिया | मगर अंदर ही अंदर Wuhan National Institute of Virology Bio Safety Lab ने इसकी जाच चलने दी |

               इस लैब में पिछले कई सालों से चमगादड़ से फैलने वाली बीमारियों पर रिसर्च चल रही थी, ये रिसर्च इसलिए चली क्योंकि ना सिर्फ़ बुहान और आसपास के इलाकों में चमगादड़ की तादाद ज्यादा है बल्कि यहां चमगादड़ और दूसरे तमाम जानवरों के मांस खाने और सूप पीने का चलन भी जोरों पर है| पर अब तक कि जांच में यह तो साफ हो रहा था कि हो ना हो यह जानलेवा वायरस इन्ही चमगादड़ से फैला है चाइनीस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन की स्टडी गेट डाटा भी इसी तरफ इशारा कर रहे थे | डॉ लीवेल्लियांन्ग इस बीच लगातार अपने डॉक्टर साथियों लोगों को इस जानलेवा वायरस से ना सिर्फ़् आगाह कर रहे थे बल्कि पीड़ितों को आइसोलेशन वार्ड में रखकर अपने तौर पर इलाज भी कर रहे थे| इसी बीच ये खबर चीन से निकलकर दुनिया तक पहुचनी शुरू हो गई|

              चीन भी अब आखिरकार ये मान लिया कि उसके मुल्क को कोरोना नाम की महामारी ने जकड़ लिया है वहीं दूसरी तरफ चीनी सरकार ने 34 साल के डॉक्टर लीवेल्लियांन्ग के वायरल हो चुके कोरोनावायरस आगाह करने वाले मैसेज का संज्ञान लेते हुए नोटिस भेजकर उनसे जवाब मांगा मगर डॉक्टर लीवेल्लियांन्ग की परेशानियां यहीं खत्म नहीं हुई इसके फौरन बाद उन पर अफवाह फैलाने का आरोप लगा दिया गया और लिखित में माफी मांगनी पडी और इसी बीच आसपास के इलाकों के साथ-साथ पुरा चीन इस कोरोना नाम की महामारी का शिकार हो चुका था| और उससे होने वाली मौतों का आंकड़ा अब लगातार बढता जा रहा था |

                अचानक खबर आयी की कोरोनावायरस के बारे में सबसे पहली जानकारी देने वाले डॉक्टर ली की मौत हो गई है बताया गया कि डॉक्टर ली 12 जनवरी से अस्पताल में भर्ती थे और 30 जनवरी को पता चला कि वह कोरोनावायरस की चपेट में आ चुके हैं| चीन ने कहा कि उन्हें बचाने की भरपूर कोशिश की गई लेकिन बचाया नहीं जा सका वूहान सेंट्रल हॉस्पिटल ने अपनी रिपोर्ट में कहा डॉक्टर ली की मौत 7 जनवरी की रात करीब 2:58 पर हुई, बताया गया कि उन्हे कफ़् और बुखार था हालांकि सरकार विरोधी गुटों का मानना था कि चीन ने उन्हें इस महामारी का खुलासा करने की सजा दी है यह खबर तब भी हाबी हुयी जब शुरुआत में चीन के बीस हजार कोरोना पीडितो को मार देने के लिए कोर्ट में अर्जी देने की खबर आई थी| मगर ये दोनो ही खबरे पुरी तरह से साबित नही हो पायी| मगर चीन में जो कंफर्म हुआ वह था दुनिया में अब तक का सबसे जानलेवा वायरस के सामने आने का सच | जब तक देखते ही देखते हजारों लोगों को अपनी चपेट में लेकर बेमौत मार चुका था डॉक्टर लीवेल्लियांन्ग जिन्होंने दुनिया को सबसे पहले कोरोनावायरस के बारे मे दुनिया को आगाह किया उनकी मौत भी हो चुकी है | ये मौत कोरोनावायरस से हुई या फिर चीन की सरकार ने उन्हें यह राज दुनिया के सामने करने की सजा दी यह सवाल अब भी बना हुआ है| सवाल ये भी बना हुआ कि कोरोनावायरस चमगादड़ से फैला हुआ है या चीन की लैब से |

खुद चीनी वैज्ञानिक इस बात का दावा कर रहे हैं कि जानलेवा वायरस किसी जानवर से नहीं बल्कि चीन की लापरवाही से फैला हुआ है|

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